रानुप्रिया(रायपुर):- कल्पवास में आज लोमश ऋषि आश्रम में श्री आर.एन. तिवारी, श्री सूरज टेलर, प्रहलाद गंधर्व, फिरथ राम , रमेश साहू आदि मानस प्रेमी श्रोता उपस्थित थे। मानस के सुंदरकांड के प्रसंग का वर्णन करते हुए सूरज टेलर ने कहा की लंकनी ने देखा की सूक्ष्म रूप धारण करके कोई वानर जा रहा है, लंकनी को यह ठीक नहीं लगा, उसने हनुमान जी से कहा अरे बंदर, तू कौन है, मुझसे पूछे बिना तो अंदर कैसे जा रहा है ।हनुमान जी ने सहज में उत्तर दिया, मुझे लंका देखनी है, लंकनी को क्रोध आया और कहा अरे वानर मेरी आज्ञा के बिना तू अंदर आया कैसे ? तब हनुमान जी ने बाएं हाथ से मुष्ठी का प्रहार लंकनी पर किया, लंकनी रुधिर वमन करने लगी, तब उसे विश्वास हो गया कि यह वानर कोई साधारण नहीं है, जब ब्रह्मा जी रावण को वरदान देने के लिए आए हुए थे, तब ब्रह्मा जी ने लंकनी से कहा था कि एक बंदर जब आवे और तेरे ऊपर मुष्ठी का प्रहार करें और तुम मुर्छित हो जावो तो समझ लेना रावण का विनाश काल आ गया है, आज मैं समझ गई कि तुमने जो मुझ पर प्रहार किया है, उसके कारण यह निश्चित हो गया की रावण का विनाश अवश्यम भावी है, अब रावण का शीघ्र ही विनाश होगा। कथा श्रवण हेतु आज बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे, तत्पश्चात श्री आर.एन. तिवारी जी ने भी श्रोताओं को संबोधित किया।
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