पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मारे नक्सलियों में एक वरिष्ठ नेता और केंद्रीय समिति सदस्य (सीसीएम) मोड़ेम बालकृष्ण उर्फ भास्कर भी शामिल…(सूत्रों का माने तो 58 वर्षीय बालकृष्णन शुगर पेशेंट थे)

रानुप्रिया/प्रवीण देवांगन: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में तीन दिनों से चले आ रहे नक्सली ऑपरेशन का सफल समापन करते हुए जवानों ने सघन मुठभेड़ में तकरीबन एक दर्जन नक्सलियों के मारे जाने की पुष्टि की है, कुल्हाड़ीघाट और भालुदिग्गी पहाड़ियों पर शुरू हुए इस ऑपरेशन में नक्सलियों के साथ भीषण लड़ाई हुई।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर जिले में चलाये जा रहे नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत आज तीन दिनों तक थाना मैनपुर क्षेत्र के जंगलो में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच जबरदस्त मुठभेड़ हुआ… मिली जानकारी के अनुसार- नक्सलियों की उपस्थिति की सूचना पर गरियाबंद पुलिस की E-30 टीम, STF एवं COBRA के जवान संयुक्त रूप से सर्च ऑपरेशन के लिए जंगल में रवाना हुए थे, सर्चिंग के दौरान जवानों और नक्सलियों के बीच सुबह से रुक-रुक कर गोलीबारी हो रही है…
जानकारी के अनुसार- मुठभेड़ में बड़ी कामयाबी भी मिली, एक करोड़ का इनामी नक्सली कमांडर मनोज उर्फ मॉडेम बालकृष्ण उर्फ भास्कर भी मारा गया, बताया जा रहा कि 58 वर्षीय कमांडर भास्कर तेलांगना का रहने वाला था और 35 साल से सक्रिय था, भास्कर नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी का सदस्य भी था, इसकी पुलिस को अर्से से तलाश थी, बताया जा रहा कि ये नक्सली कमांडर गरियाबंद के रास्ते उड़ीसा भागने की फिराक में था…
डेढ़ साल में 500 नक्सली मारे गए…
बीते तीन महीने में छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों की यह दूसरी बड़ी कामयाबी है, इससे पहले मुठभेड़ में नक्सलियों का बड़ा कमांडर बसवराजू मारा गया था, पिछले डेढ़ वर्ष में छत्तीसगढ़ में लगभग 500 नक्सली मुठभेड़ों में ढेर किए गए हैं, जबकि 20 वर्षों में करीब 1500 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया और 3000 से अधिक ने आत्मसमर्पण किया है. यह अभियान नक्सलवाद के खिलाफ केंद्र और राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है.

कौन था मॉडेम बालकृष्ण? एक करोड़ के इनामी कमांडर के मरने से हिला नक्सली संगठन
केकेबीएन डिवीजन का नेतृत्व करता था बालकृष्ण…
मॉडेम बालकृष्ण उर्फ मनोज एक माओवादी नेता था जो प्रतिबंधित संगठन का केंद्रीय समिति सदस्य था, जिसे 2025 की शुरुआत में ओडिशा पुलिस ने लक्षित किया था, वह केकेबीएन डिवीजन का नेतृत्व करता था और उसे आंध्र प्रदेश के वारंगल जिले का निवासी बताया गया है, मॉडेम बालकृष्ण को मनोज के नाम से भी जाना जाता था, जनवरी 2025 में ओडिशा पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए कार्रवाई करने का फैसला किया था, क्योंकि वह लंबे समय से पुलिस से बच रहा था, बालकृष्णा को संगठन की विस्तार रणनीति और बड़े हमलों की योजना का मुख्य क्रियान्वयनकर्ता माना जाता था….
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