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29 Jan 2026, Thu

kalchakranews24 गोबरा नवापारा का ‘परमधाम’ – जहाँ अंत नहीं, अमरता की शुरुआत होती है…

रानुप्रिया(रायपुर): जहाँ स्वच्छता, संस्कार, हरियाली और मानवीय संवेदनाएँ एक साथ सांस लेती हैं… यह मुक्तिधाम केवल अंतिम संस्कार का स्थल नहीं, बल्कि जीवन और मृत्यु के शाश्वत संवाद का मंदिर है। यहाँ पहुँचकर व्यक्ति महसूस करता है कि अंत भी कितना सुंदर, शांत और सुसंस्कारित हो सकता है…

व्यवस्था और सौंदर्य की मिसाल.. परमधाम समिति ने जनसहभागिता और सेवा-भाव से इस स्थल को स्वच्छता और सुंदरता का प्रतीक बना दिया है।
यहाँ बिजली, पेयजल, शेड, सौचालय, स्नानागार, बैठक व्यवस्था और लकड़ी की समुचित उपलब्धता है। पूरे परिसर की नियमित सफाई, पक्का एप्रोच रोड, और भव्य काँच से सजे बैठक हॉल इसकी आधुनिकता और सुसंरचना का परिचायक हैं…

चारों ओर फैली मजबूत बाउंड्रीवाल और हर कोने में खिला हरियाली का संसार — यह सब मिलकर इसे किसी बाग़ की तरह शांत और पवित्र बनाते हैं… यहाँ बादाम, केला, सीताफल, जाम, आम, कटहल, इमली, करोंदा, गंगाइमली और जामुन जैसे फलदार वृक्ष जीवन की हर ऋतु का प्रतीक बनकर खड़े हैं…

🕊️ संवेदनाओं और सहभागिता का स्थल..
यहाँ पशु-पक्षियों के लिए चारे और दाने की व्यवस्था प्रतिदिन की जाती है — मानो परमधाम केवल मनुष्यों के लिए नहीं, बल्कि हर जीव के लिए खुला मंदिर हो।

इस स्थल की सबसे बड़ी विशेषता है — यहाँ पुरुषों से अधिक महिलाओं की सहभागिता। वे वृक्षारोपण, सफाई, और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। यहाँ के आसपास के लोग प्रतिदिन morning walk और evening walk के लिए आते हैं — जहाँ कदमों की आहट नहीं, बल्कि श्रद्धा की सरगम गूंजती है।

सुरक्षा हेतु यहाँ एक चौकीदार अपने परिवार सहित निवास करता है। हर 15 अगस्त और 26 जनवरी को यहाँ ध्वजारोहण, सुंदरकांड पाठ और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं, जो यह सिद्ध करते हैं कि यह स्थल सिर्फ शोक का नहीं, बल्कि संस्कार और सामाजिक एकता का उत्सव स्थल है।

💧 आस्था और निर्मलता का अनोखा अनुभव…
संस्कार के उपरांत जब लोग विदाई लेते हैं, तो फव्वारों से पवित्र जल का छिड़काव किया जाता है, यह केवल शुद्धि का प्रतीक नहीं, बल्कि इस संदेश का भी कि “मृत्यु अंत नहीं, आत्मा की निर्मल यात्रा की शुरुआत है।”

यह मुक्तिधाम Public-Private Partnership (PPP) मॉडल के अंतर्गत संचालित है, जहाँ पारदर्शिता और ईमानदारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यहाँ ऑडिट कार्य नियमित रूप से होता है और समिति के बैंक खाते में लगभग 6 लाख रुपये की निधि सुरक्षित रखी गई है, जो समाज के भरोसे और समर्पण का प्रतीक है।

परमधाम – समाज का दर्पण, संस्कारों का संगम..
यह स्थान हमें याद दिलाता है कि यहीं से हमारी परलोक यात्रा प्रारंभ होती है।
इसलिए इसका सुसज्जित, स्वच्छ और पवित्र रहना केवल समिति की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।
हर व्यक्ति को इस कार्य से जुड़ना चाहिए — कोई श्रमदान से, कोई वृक्षारोपण से, कोई आर्थिक सहयोग से — ताकि आने वाली पीढ़ियाँ देखें कि कैसे एक नगर ने अपने संस्कारों को इतनी श्रद्धा से संजोया।

“परमधाम” केवल एक स्थल नहीं, एक विचार है…
जहाँ मिट्टी से मिट्टी मिलती है, और मनुष्य अपनी अमरता की झलक पाता है। यह गोबरा नवापारा की आत्मा है — जहाँ सेवा में श्रद्धा, स्वच्छता में पूजा, और हरियाली में जीवन झलकता है…

संदेश समाज के नाम..
“मुक्तिधाम से जुड़ना मतलब जीवन से जुड़ना —
क्योंकि यहीं हमें वह सच्चाई दिखती है,
जो हमें बेहतर इंसान बनाती है…
यह स्थान हमें सिखाता है कि अंत भी सुंदर हो सकता है,
यदि जीवन में सेवा और संवेदना जिंदा हो…”


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