रानुप्रिया(रायपुर): मध्य प्रदेश छिंदवाड़ा के डिप्टी कलेक्टर रहे गुरु सेवक परम पूज्य गुरुदेव नारायण दत्त जी श्रीमाली के आध्यात्मिक औरा से प्रभावित नौकरी छोड़ 1984 में गुरु धाम जोधपुर पहुंचकर गुरु भक्ति में समा गए 1983 84 में छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में बाकायदा डिप्टी कलेक्टर ट्रांसफर होकर आए थे जो जोधपुर जाकर फिर कभी अपने प्रशासनिक सेवा में वापस नहीं आए…

महाकाल की नगरी उज्जैन में शिप्रा नदी किनारे भूखी मंदिर माता के सामने छोटी सी कुटिया बनाकर सतत चार दशक तक साधना आराधना के साथ अखंड यज्ञ तप करते रहे हजारों साधको को उनके पुण्य लाभ भी मिलते रहा विगत दिनों 10 नवंबर को देश त्याग कर सिद्ध आश्रम गुरु सेवा में गण कर गए..
प्रकृति के साक्षी गुरु साधक डॉ. आनंद राम मतावले (गुरूजी) ने भी गुरु सेवक श्रीवास्तव जी के आध्यात्मिक जीवनशैली के बारे में साझा किया और कहा-

डिंका 23 नवंबर को तेरी शांति भोज भूखी माता मंदिर के सिद्ध आश्रम शोध शाला उज्जैन मध्य प्रदेश में रखा गया है..

इधर गुरु सेवक जी के देह त्याग सिद्धासन गमन से राजिम क्षेत्र के गुरु भक्तों ने भी उनकी आत्म कल्याण सफलता की कामना किऐ.. प्रमुख रूप से उपस्थित डॉक्टर आनंद मतावले(गुरुजी), डॉक्टर पन्नालाल वशिष्ठ, नंदी राम साहू बेलटुकड़ी, लोकनाथ तरीघाट,परमानंद साहू, बिश साहू तारीघाट, अमर वर्मा जी रायपुर, रामधन जोशी कुंडेल..
इधर धर्म नगरी राजिम निवासी साधक परिवार से डॉ.पन्नालाल वशिष्ट ने गुरु सेवक श्रीवास्तव जी के बारे में साझा किया वे अद्भुत अध्यात्मिक गुरु सेवक थे जिन्होंने सन १९८३ में म.प्र. छिन्दवाड़ा से ट्रांफर पहुंचे छत्तीसगढ़ क्र दुर्ग जिले में बतौर डिप्टी कलेक्टर के पद को त्यागकर गुरु जी निख्लेश्वारा नन्द के संग हो लिए…(डॉ.पन्नालाल वशिष्ट)

विगत महिना संत के दिव्य जागृत स्थान पर प्रत्यक्ष डॉ.पन्नालाल जी वशिष्ट द्वारा किये गए अनुष्ठान एवं यज्ञ

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