मा. जिलाधीश महोदय आपके अधिनस्थ जिला के माइनिंग अधिकारी सजक पत्रकार एवं प्रतिनिधियों के नंबर को आखिर ब्लॉक क्यों रखते हैं यह भी एक बड़ा सवाल है..???

जहां एक ओर कोल माइंस खनिज दोहन में कमीशन के चलते राज्य के रूत्वेदार IAS बमुश्किल जेल के सशक्त कैद से शर्तों में रिहा हुए, वहीं गरियाबंद जिले में भी बड़ी मात्रा में खनिज का दोहन होते देखा जा रहा है, दबी जबान में लोग कहते, यहां भी कमीशन का बड़ा खेल चल रहा है, इस स्वर्ण रजत सामान कीमती रेत की खुलेआम तस्करी गरियाबंद जिला प्रशासन के नाक रोज सैकड़ो ट्रिप हाईवा अवैध तस्करी देखी जा रही है…

वहीं जीवन दायनी महानदी का सीना पूरी तरह से छलनी हो चुकी, जगह-जगह बड़े-बड़े खाई नूमा गड्ढे देखकर आप अंदाज लगा सकते हैं, किस प्रकार से तस्करों ने अधिकारियों के साथ मिली-भगत कर रेत की भयंकर दोहन किये है.. जबकि आपको बता दें इस भारी भरकम दोहन से सरकार के खजाने में कौड़ी भी नहीं पहुंच पा रहे हैं, वहीं यहां के आला अफसर एवं खनिज माफिया के बीच पूरी तरह सांठ-गांठ दिखाई पड़ती है…

इधर कार्यवाही के नाम पर यह अधिकारी बस छोटे-मोटे मामले कोई अंजाम देते नजर आते हैं.. खनिज संपदा की इतनी भारी दोहन उपरांत प्रतीत होता मानो यहां के जिला अधिकारी, जिला को संभाल पाने में असमर्थ तो नहीं..???

मा. जिलाधीश महोदय आपके अधिनस्थ जिला के माइनिंग अधिकारी सजक पत्रकार एवं प्रतिनिधियों के नंबर को आखिर ब्लॉक क्यों रखते हैं यह भी एक बड़ा सवाल है..???
क्या हम मान ले कि यहां कमीशन का कोई बड़ा खेल चल रहा है..?? जिसके कारण आप अपने अधीनस्थ अधिकारियों को कर्तव्य बोध का पाठ पढ़ाने में कहीं असमर्थ तो नहीं..??
(बहरहाल देखते हैं इस संवेदनशील ध्यान आकर्षण खबर के बाद आपकी कार्यवाही किस हद तक होती है)
किसके संरक्षण में फल-फूल रहा है माफिया राज?? पार्ट-01
जिला प्रशासन पर उठा सवाल 🤔 रेत तस्करों को कैसे बढ़ावा?? पार्ट -०२
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