युवावर्ग अपनी शक्ति को बर्बाद न होने दें – प्राचार्य गौरीशंकर निर्मलकर…
रानुप्रिया(रायपुर):- विगत दिनों सरस्वती शिशु मंदिर नवापारा में करोड़ों युवाओं के पथ-प्रदर्शक, प्रेरणा स्रोत संत स्वामी विवेकानंद की जयंती मनाया गया, तत्पश्चात दम्मानी कालोनी से होते हुए ओम शांति कालोनी, नवीन प्राथमिक शाला से मैडम चौक, पारागांव होते हुए देशभक्ति से ओतप्रोत नारे लगाते हुए समस्त बच्चो की सामूहिक रैली निकाली गई।

जहाँ पार्षद लोमेश्वरी साहू ने बच्चों को चॉकलेट बांटकर, गोपाल यादव प्रधानपाठक नवीन प्राथमिक शाला, समस्त स्टॉफ एवं बच्चों ने तिलक लगाकर स्वागत अभिनंदन किया, इस अवसर पर प्राचार्य गौरीशंकर निर्मलकर ने कहा की- आज के युवावर्ग को जिसमें देश का भविष्य निहित है और जिसमें जागरण के चिह्न दिखाई दे रहे हैं, अपने जीवन का एक उद्देश्य ढूँढ लेना चाहिए। हमें ऐसा प्रयास करना होगा ताकि उनके भीतर जगी हुई प्रेरणा तथा उत्साह ठीक पथ पर संचालित हो।
वरिष्ठ शिक्षक नरेश यादव ने अपने उद्बोधन में कहा -स्वामी विवेकानन्द का जन्म: 12 जनवरी 1863 को हुआ था। उनका वास्तविक नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था। उन्होंने अमेरिका स्थित शिकागो में सन् 1893 में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था। उन्हें 2 मिनट का समय दिया गया था किन्तु उन्हें प्रमुख रूप से उनके भाषण का आरम्भ “मेरे अमेरिकी बहनों एवं भाइयों” के साथ करने के लिये जाना जाता है उनके संबोधन के इस प्रथम वाक्य ने सबका दिल जीत लिया। वरिष्ठ शिक्षक नरेश यादव, दीपक देवांगन, कृष्ण कुमार वर्मा, नरेंद्र साहू, सरोज कंसारी नारायण पटेल, रेणु निर्मलकर, वाल्मीकि धीवर, हुलेश्वरी साहू, चेतन साहू ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग किया.

