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1 Dec 2025, Mon

kalchakranews24 गोंचा के पहले भगवान जगन्नाथ १५ दिनों के लिए क्यों बीमार पड़ते है..? एक रोचक कथा

ॐ…ज्येष्ठ पूर्णिमा के बाद भगवान जगन्नाथ 15 दिनों के लिए बीमार होकर एकांतवास में चले जाते हैं। इसे अनासर या ज्वर लीला कहा जाता है।💥💥 इस दौरान मंदिर के पट बंद रहते हैं और केवल दायित्वगण ही भगवान की सेवा में रहते हैं।👏

जगन्नाथपुरी रथ यात्रा भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर में प्रसिद्ध है। रथयात्रा में शामिल होने के लिए भगवान जगन्नाथ के भक्त दुनिया भर से आते हैं। जगन्नाथ यात्रा शुरू होने से 15 दिन पहले भगवान जगन्नाथ उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा बीमार पड़ जाते हैं, ऐसा हर साल होता है। इस समय को एकांतवास का समय माना जाता है क्योंकि इस समय के दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और बहन सुभद्रा एकांतवास में चले जाते हैं। जहां किसी भी भक्त को उनके पास जाने की अनुमति नहीं होती। इस अवधि को ‘अनसर काल’ भी कहा जाता है। जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा से पहले भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी को 108 मटकों के सुगंधित जल से स्नान कराया जाता है। इस अनुष्ठान को ‘स्नान पूर्णिमा’ के नाम से जाना जाता है।

भगवान जगन्नाथ से मिलने पुरी पहुंचे माधवदास
माधवदास स्वभाव से बहुत सरल थे। उन्हें दुनियादारी की समझ नहीं थी। छल-कपट से दूर माधवदास बहुत ही सरल भाव से मंदिर के सामने लगे एक पेड़ की छांव के नीचे बैठ गए। जब मंदिर के पुजारी माधवदास को प्रसाद देने आए, तो माधवदास ने प्रसाद लेने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वे अपने प्रभु भगवान जगन्नाथ के हाथों से ही प्रसाद ग्रहण करेंगे। माधवदास ने पुजारी से भगवान जगन्नाथ को बुलाने के लिए कहा, पुजारी हैरानी से माधवदास को देखते रहे। इस तरह भूखे-प्यासे रहकर माधवदास ने हठ कर लिया कि वे केवल भगवान जगन्नाथ के हाथों से ही अन्न ग्रहण करेंगे।

भगवान जगन्नाथ माधवदास की 15 दिनों की बीमारी अपने ऊपर ले ली
माधवदास कई वर्षों तक पुरी में रहकर भगवान जगन्नाथ जी की भक्ति करते रहे और हर रोज उनके दर्शन करते। दोनों मित्र बन गए। कई वर्षों बाद प्रकृति चक्र घूमा और माधवदास युवा अवस्था से वृद्धावस्था में प्रवेश करने लगे। इस समय के दौरान माधवदास जी बीमार पड़ गए। उनकी बीमारी में भगवान जगन्नाथ ने दिन-रात उनकी सेवा की। बीमारी से कमजोर हो चुके माधवदास ने एक दिन भगवान जगन्नाथ से कहा-प्रभु! आप तो जगत के स्वामी हैं, तो क्या आप मेरी बीमारी ठीक नहीं कर सकते?” इसके जवाब में भगवान जगन्नाथ ने कहा- “मित्र माधवदास! मैं तुम्हें मोक्ष देना चाहता हूं। पिछले जन्म के कर्म भोगने के बाद तुम पवित्र हो जाओगे। अभी तुम्हारी बीमारी के बस 15 दिन बचे हैं।” प्रभु जगन्नाथ की बात सुनकर माधवदास ने कराहते हुए कहा-“प्रभु! लेकिन मुझे अत्यंत पीड़ा हो रही है।” यह सुनते ही प्रभु जगन्नाथ ने एक चमत्कार किया और माधवदास की 15 दिनों की बची हुई बीमारी की पीड़ा अपने ऊपर ले ली। इस दिन ज्येष्ठ पूर्णिमा थी। माधवदास ठीक हो गए लेकिन प्रभु जगन्नाथ बीमार पड़ गए। इस तरह कुछ समय बाद माधवदास जी को मोक्ष मिला और तब से प्रभु जगन्नाथ अपने परम भक्तों की 15 दिनों की बीमारी अपने ऊपर ले लेते हैं और हर साल ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन से अगले 15 दिनों के लिए बीमार पड़ते हैं और एकांतवास में चले जाते हैं।


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