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15 Mar 2026, Sun

रायपुर:- आज NSUI ने छत्तीसगढ़ पैरामेडिकल कॉलेज के रिजिस्टर जितेन्द्र तिवारी से मिलकर प्रदेश में चल रहे फर्जी कॉलेजो के ख़िलाफ़ कार्यवाही को लेकर ज्ञापन दिया इन कॉलेजों द्वारा छात्रों को फर्जी दस्तावेज़ और जाली मान्यता पत्र दिखाकर प्रवेश दिलाया जा रहा है। डिग्रियाँ मध्यप्रदेश या अन्य राज्यों की फर्जी संस्थाओं के माध्यम से डिस्टेंस मोड़ में दी जाती हैं, जिनकी न तो कोई कानूनी वैधता है और न ही किसी रोजगार में उपयोगिता है रजिस्ट्रार जितेंद्र तिवारी ने कहा कि पूरे प्रदेश में सिर्फ 14 कॉलेजों को ही मान्यता है बाकी जितने भी पैरामेडिकल कॉलेज चल रहे है सभी फर्जी है।

छत्तीसगढ़ में चल रहे पैरामेडिकल शिक्षा के नाम पर बड़े पैमाने पर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।

प्रदेश में 100 से अधिक पैरामेडिकल कॉलेज
एनएसयूआई ने एक गंभीर खुलासा करते हुए कहा है कि प्रदेशभर में “100 से अधिक फर्जी पैरामेडिकल कॉलेज” संचालित हो रहे हैं, जो बिना किसी वैध मान्यता के BMLT, DMLT, ऑप्टोमेट्री, डायलिसिस तकनीशियन, OT टेक्नीशियन, OTI, लैब टेक्नीशियन जैसे कोर्सों का संचालन कर रहे हैं।

NSUI उपाध्यक्ष ने कहा
एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष अमित शर्मा ने कहा है कि यह न केवल छात्रों के साथ धोखा है बल्कि यह “BNS की धाराओं 420, 468, 471, 406 और आईटी अधिनियम की धारा 66D” के तहत “गंभीर आपराधिक कृत्य” भी है।

फर्जी पैरामेडिकल इंस्टिट्यूट बंद
हाल ही में गजानंद इंस्टिट्यूट जो फर्जी डिग्री बॉटने का काम करता है उसका विरोध NSUI जिलाध्यक्ष प्रशांत गोस्वामी ने किया जिस पर संचालन द्वारा झूठा FIR दर्ज करवा दिया गया इन फ़र्जी डिग्री बेचेने वाले और फर्जी पैरामेडिकल कोर्स का संचालन करने वाले गजानंद इंस्टिट्यूट को बंद करवएगी।

एनएसयूआई की प्रमुख माँगें

  1. प्रदेशभर के सभी पैरामेडिकल संस्थानों की विशेष जाँच कराई जाए।
  2. जिन संस्थानों के पास मान्यता नहीं है, उनके विरुद्ध “FIR दर्ज कर गिरफ्तारी” की जाए।
  3. फर्जी डिग्रियों से प्रभावित छात्रों को “न्याय और पुनर्वास”के लिए विशेष योजना लाई जाए।
  4. फर्जी संस्थानों को तत्काल बंद किया जाए और छात्रों का पैसा वापस किया जाए।

एनएसयूआई ने चेतावनी दी है कि यदि इस पूरे घोटाले में शीघ्र कार्रवाई नहीं की जाती, तो प्रदेशभर में चरणबद्ध आंदोलन और उग्र प्रदर्शन किए जाएंगे, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ पैरामेडिकल काउंसिल एवं संबंधित विभागों की होगी।

“यह केवल डिग्रियों का मामला नहीं है, यह छत्तीसगढ़ के युवाओं के भविष्य के साथ किया गया विश्वासघात है। हम हर मंच पर इस लड़ाई को उठाएँगे और दोषियों को सजा दिलाकर रहेंगे।

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